You have entered the world of InnerSoul …!


You’ll find positive, Motivational thoughts... In poetry few are written by Me n others too & Some r Translated also. I feel that thoughts heighten the awareness of our feelings & world around us.

क्यू ढूढ़ते है ?

यह पोस्टिंग पढने के लीये "design" पर क्लिक करें ...!

15 comments:

संत शर्मा said...

"क्यु ढूंढ़ते है" मन के धरातल पर उठते अनुतरित प्रश्नों की सुन्दर अविव्यक्ती |

रश्मि प्रभा... said...

aprapya ke piche bhagna manushya ki niyti ban jati hai......kadwahat me mithas ! neem ya karaila mitha hota hai kya? mithas wahin milti hai,jo samay ke chakra me kadwa hota hai....ganga wahin milti hai,jahan uska udgam hai. naale se ganga......asambhaw!
par bhatakna niyti hai,mann ki atript pyaas hai- kash! koi samajhta

अशोक लव said...

man hai n , iskee talash jaree rahtee hai. MITHAAS bhee vahan talaashte hain jahan se kadvaahat milee...yahee mahanta hai.

Manish Manu said...

ATI SUNDER RACHNA HAI .......
AAJ KE IS KADWAHAT KE DUR MAI MEETHAS VASTEV MAI DHUDNE JAISE VASTU HO GAYI HAI ........

AAJ KE SAMAY PER KAI ANUUTTRAIT PRASHNO KI BADI HI SUNDER ABHIVAKTI HAI ...

ajitji said...

preeti ji achchha khayal hai,, jevan me kuchh dhundate rahne se uski sarthakataa bani rahtihai,,

sundar lekhan par badhaai

Himalayi Dharohar said...

आपको पढ़कर बहुत अच्छा लगा. सार्थक लेखन हेतु शुभकामनाएं. जारी रहें.............

jenny shabnam said...

प्रीती,
जीवन मृग-मरीचिका सा है, खोजते रहते हैं... कभी ख़ुशी कभी सुख कभी शांति, जबकि सब ख़ुद के पास है| पर ढूंढने में मन की संतुष्टि भी तो निहित है कि हमने प्रयास तो किया, शायद उम्मीद भी कायम रहती है जीवन-आस की| अच्छी रचना केलिए बधाई|

MUFLIS said...

"phir bhi diye ki lau meiN usse dhooNdte haiN...."

jeevan-darshan ko
prativimbit karti hui
achhee rachnaa...

abhivaadan svikaareiN
---MUFLIS---

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सुंदर व्यंजनाएं।
दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
आप ब्लॉग जगत में महादेवी सा यश पाएं।

-------------------------
आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

MUFLIS said...

रचना से ग़ज़ल का एहसास होता है
भाव पक्ष बहुत ही सुन्दर है
मन की बात कहना आसान तो नहीं

अभिवादन स्वीकारें

sangeeta said...

kabhi mann upvan men aham dhoondhate hain...insaani fitrat ko sateek shabd diye hain...badhai

R. Venukumar said...

प्रीति जी , (अंतरंग)..
भावों पर ही आपका ध्यान है। जो बाढ़ है, उसे गढ़ना मुश्किल, उसे मोड़ना मुश्किल, मगर बाढ़ थमने के बाद खेत और घर द्वार की नये सिरे से साज सज्जा हमारी बाद की जिम्मेदारी, अगर वक्त है तो ,वर्ना गुजर तो ऐसे भी जाएगी ही.अनुभूतियां अच्छी हों तो अपनी जगह पहुंच जाती हैं.

श्यामल सुमन said...

भाव अच्छे हैं और शुरु की दो पंक्तियाँ अच्छी बन पड़ी है।

आदमी बेचैन होता जब वक्त बुरा होता है
वक्त वही जब वो अपनों की नजर ढ़ूँढ़ते हैं

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

M.L.S said...

क्या ढूदते है , बहुत सुन्दर रचना है मन के भावो को बहुत अच्छे तरीके से निखारा है

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

Superb