
"अन्तरंग" याने मेरे दिल का कोना,जो अब तक अ:जन्मा–अनकहा कही जी रहा था, मेरे एहसासों को शब्द मिले और इन् शब्दों से मुझे एक् पहचान मिली!
You have entered the world of InnerSoul …!
You’ll find positive, Motivational thoughts... In poetry few are written by Me n others too & Some r Translated also. I feel that thoughts heighten the awareness of our feelings & world around us.
ऋणानुबंधन ...

तुझसे लफ्जो का नहीं रूह का रिश्ता है मेरा, मेरी सांसो में बसी रहती है खुश्बू तेरी ...

हर बात में महकते एहसासों की खुशबु ,
याद आई वो पहली मुलाक़ात की खुशबु ...
रिश्ते की रचना ने रिश्ता बनाया ,
बिछड़े थे बरसो से जो, उसे है मिलवाया ....
दिल के दरवाजे से निकला ये अनोखा बंधन ,
दिल की धड़कन बन धड़कता ये अनोखा बंधन ,
प्रेम के धागों से बुना ये अनोखा बंधन ,
प्यारे से रिश्तो से गुथा ये अनोखा बंधन ,
ममता से हरा-भरा ये अनोखा बंधन ,
सूत के धागों सा अटूट ये अनोखा बंधन ,
नदी की पानी सा बहता ये अनोखा बंधन ,
दिये की लौ सा प्रकाशित ये अनोखा बंधन ,
बरसात सा स्नेह का झरता ये अनोखा बंधन ,
चांदनी सा शीतल है ये अनोखा बंधन ,
फूलो सा कोमल है ये अनोखा बंधन ,
तेरा और मेरा, अजब सा ये अनोखा बंधन ......
याद आई वो पहली मुलाक़ात की खुशबु ...
रिश्ते की रचना ने रिश्ता बनाया ,
बिछड़े थे बरसो से जो, उसे है मिलवाया ....
कभी कभी कुछ क्षण का परिचय कुछ ख़ास बन जाता है, और ऐसे संबंध जो ना समझ आये या कह लो जिसका ताल मेल बुद्धि से भी ना मिल पाए, ऐसा बंधन, एक अटूट "ऋणानुबंधन", और यह बंधन कब, क्यों, कैसे - किसी से बन जाता है यह समझ ही नहीं आता ... बस बन जाता है ...
दिल के दरवाजे से निकला ये अनोखा बंधन ,
दिल की धड़कन बन धड़कता ये अनोखा बंधन ,
प्रेम के धागों से बुना ये अनोखा बंधन ,
प्यारे से रिश्तो से गुथा ये अनोखा बंधन ,
ममता से हरा-भरा ये अनोखा बंधन ,
सूत के धागों सा अटूट ये अनोखा बंधन ,
नदी की पानी सा बहता ये अनोखा बंधन ,
दिये की लौ सा प्रकाशित ये अनोखा बंधन ,
बरसात सा स्नेह का झरता ये अनोखा बंधन ,
चांदनी सा शीतल है ये अनोखा बंधन ,
फूलो सा कोमल है ये अनोखा बंधन ,
तेरा और मेरा, अजब सा ये अनोखा बंधन ......
अनोखा बंधन ... कितना सुन्दर और पवित्र नाम ? सुन कर ही कुछ अलौकिक अनुभूति का एहसास हो जाता है. जैसे पूर्व-जन्म का कोई बंधन ? जो युग-युग से जनम लेकर एक हृदय को हृदय से जोड़ रहा हो ..? जो निर्दोष, निस्वार्थ प्रेम भाव का झरना बन अविरत बहता रहता है .. और यह एहसास सिर्फ महसूस किया जा सकता है किसी शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, जो सामाजिक और खून के रिश्तो से परे है और कुछ अलौकिक और अनोखा बंधन है ...

दुनिया कहती है उन्हें की उन्होंने मुझे जन्म नहीं दिया,
पर - ' माँ ' तो वही है …..
मेरे दर्द की भावनाओ को पल - प्रतिपल भोगा है,
मेरी जिंदगी को कुछ मायने दिए,
एक राह दी,
एक चाह दी,
हर पल यह एहसास दिया की साथ हूँ मैं तेरे ,
तो - ' माँ ' तो वही है न्…..!
मेरे दर्द की भावनाओ को पल - प्रतिपल भोगा है,
मेरी जिंदगी को कुछ मायने दिए,
एक राह दी,
एक चाह दी,
हर पल यह एहसास दिया की साथ हूँ मैं तेरे ,
तो - ' माँ ' तो वही है न्…..!
अविरत, अविरल, अदृश्य यह एहसास आपका ,
स्नेह, प्रेम और अप्रतिम यह दुलार आपका ...
बहुत खोया – बहुत कुछ पाया भी आपसे ,
अजमाया जिंदगी ने, जिंदगी से मिलवाया आपने ...
कृष्ण ने जो यशोदा में, कर्ण ने जो राधा में ,
वही रूप नज़र आता है मुझे आप् में ...!
स्नेह, प्रेम और अप्रतिम यह दुलार आपका ...
बहुत खोया – बहुत कुछ पाया भी आपसे ,
अजमाया जिंदगी ने, जिंदगी से मिलवाया आपने ...
कृष्ण ने जो यशोदा में, कर्ण ने जो राधा में ,
वही रूप नज़र आता है मुझे आप् में ...!
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